कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने कर लिया दिनदहाड़े 24 कार्यकर्ताओं का अपहरण

सिंधी राष्ट्रवादी संगठन जीई सिंध मुत्ताहिदा महाज (जेएसएमएम) ने कहा है कि पाकिस्तान के कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने दिनदहाड़े उनके 24 कार्यकर्ताओं का अपहरण कर लिया है। अब तक इन लोगों का कुछ पता नहीं लग पाया है। जानकारी के मुताबिक लापता कार्यकर्ताओं की उम्र 19 से 45 साल तक की है। जेएसएमएम सिंध प्रांत की एक राष्ट्रवादी, लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष राजनीतिक पार्टी है, जो पाकिस्तान अधिकृत सिंध की आजादी में विश्वास रखती है।
यह संगठन धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र और सिंध की स्वतंत्रता के रूप में सिंधियों की ऐतिहासिक पहचान की मांग कर रहा है। यह पार्टी स्वतंत्रता अभियान भी चलाती है और ‘सिंध विरोधी’ योजनाओं और पाकिस्तानी सेना की योजनाओं के खिलाफ राजनीतिक जुलूस व विरोध प्रदर्शन करती है।
जेएसएमएम पाकिस्तान को एक ‘ईश्वरवादी कट्टरपंथी, साम्राज्यवादी उपनिवेशिक और गैरजिम्मेदार राज्य’ मानता है जो उसके महासंघ में राष्ट्र के लोगों का शोषण करता है। यह वैश्विक अंतरात्मा के साथ मजबूत कूटनीति के माध्यम से सिंध के स्वतंत्रता और अधिकारों के लिए दृढ़ संघर्ष में विश्वास करता है।

शिमला एयरपोर्ट से देश की सबसे सस्ती हवाई सेवा उड़ान की शुरुआत

पीएम मोदी ने गुरुवार को शिमला एयरपोर्ट से देश की सबसे सस्ती हवाई सेवा उड़ान की शुरुआत की। इसके साथ ही महज ढाई हजार रुपए में आम आदमी हवाई सफर कर सकेगा। पीएम मोदी ने सुबह 11 बजे शिमला के जुब्बड़हट्टी हवाई अड्डे पर पहुचे और यहां उड़ान सेवा का शुभारंभ किया। प्रधानमंत्री ने कडप्पा-हैदराबाद तथा नांदेड़-हैदराबाद के बीच होने वाली इसी स्कीम की दो अन्य उड़ानों को भी हरी झंडी दिखाई।
पीएम ने इस दौरान कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि हवाई सेवा के लिए भारत में सबसे ज्यादा अवसर हैं। पहले हवाई यात्रा धनी लोग किया करते थे लेकिन अब हवाई चप्पल पहनने वाले भी हवाई यात्रा कर सकेंगे। उड़ान योजना के तहत एक घंटे से कम की उड़ान के लिए 2500 रुपए ही देने होंगे।
पीएम बनने के बाद यह मोदी की पहली शिमला यात्रा है। मोदी शिमला के से सस्ती हवाई सेवा के लिए उड़ान स्कीम शुरू करेंगे।
शिमला यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री रिज रोड पर एक रैली को भी संबोधित करेंगे। इससे पहले उन्होंने 2003 में उस वक्त शिमला का दौरा किया था जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे।
वैसे राज्य के हिसाब से यह हिमाचल प्रदेश का उनका दूसरा दौरा होगा। पिछले साल उन्होंने मंडी में एक रैली को संबोधित किया था। भाजपा में मोदी आठ वर्ष तक हिमाचल मामलों के संगठनात्मक प्रभारी थे और उन्होंने 2002 तक यह भूमिका निभाई थी।
उड़ान (उड़े देश का आम नागरिक) देश के छोटे व मझोले कस्बों को बड़े नगरों तथा परस्पर किफायती हवाई यातायात सुविधा से जोड़ने की स्कीम है।
इसके तहत 500 किमी की विमान यात्रा के लिए 2500 रुपए का किराया वसूला जाएगा। इसके तहत फिक्स विंग विमानों के मामले में यात्रा की अवधि अधिकतम एक घंटे तथा हेलीकॉप्टर के मामले में आधा घंटे मानी गई है।
“उड़ान” की उड़ानें देश के 70 हवाई अड्डों से होंगी।
इनमें 27 व्यस्त, 12 कम उपयोग में आने वाले तथा 31 अप्रयुक्त हवाई अड्डे शामिल हैं। इसके लिए विभिन्न नई, पुरानी एयरलाइनों की तरफ से कुल 27 प्रस्ताव सरकार को प्राप्त हुए हैं।
इनमें 17 एयरपोर्ट उत्तर, 24 पश्चिम, 11 दक्षिण, 12 पूर्व, 6 पूर्वोत्तर भारत तथा 2 केंद्र शासित प्रदेशों में हैं। इससे 22 राज्य व दो केंद्रशासित प्रदेश सस्ती उड़ानों से जुड़ जाएंगे।
16 प्रस्ताव एक-एक रूट पर उड़ान भरने से संबंधित हैं। जबकि 11 प्रस्तावों में एक से अधिक शहरों को जोड़ने की इच्छा जताई गई है। छह प्रस्ताव ऐसे हैं जिनमें किसी तरह की सब्सिडी (वीजीएफ) की मांग नहीं की गई है।
स्कीम के तहत एयरलाइनों को नुकसान की स्थिति में वायबिलटी गैप फंडिंग (वीजीएफ) के तहत सब्सिडी देने की व्यवस्था है। सरकार का अनुमान है कि स्कीम पर सालाना 6.5 लाख सीटों के लिए करीब 200 करोड़ रुपए की सब्सिडी की जरूरत पड़ेगी।

कांग्रेस के महासचिव गुरुदास कामत ने दिया त्यागपत्र

कांग्रेस के दिग्गज नेता व राष्ट्रीय महासचिव गुरुदास कामत ने सभी पदों से त्यागपत्र दे दिया है। एक बयान में उन्होंने बताया कि पिछले सप्ताह वह कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी से मिले थे और सारी जिम्मेदारियों से मुक्त होने की इच्छा जताई थी।
उनके वक्तव्य से साफ है कि वह अब सक्रिय राजनीति से किनारा कर रहे हैं। कामत ने बताया कि उन्होंने 3 फरवरी को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से आग्रह किया था कि उन्हें जिम्मेदारियों से मुक्त करें।
यह वह तिथि है जब मुंबई में नगर निकाय चुनाव के लिए कांग्रेस के प्रत्याशियों की घोषणा की गई थी। 21 फरवरी को जब परिणाम आया तब भी उन्होंने इस तरह की अपील नेतृत्व से की। उन्होंने पार्टी में अहम जिम्मेदारियां देने के लिए सोनिया व राहुल का आभार जताया है।

108 एंबुलेंस हड़ताल पर एक गर्भवती महिला की मौत

मरीजों को अस्पताल पहुंचाने वाली 108 एंबुलेंस के कर्मचारी गुरुवार को दूसरे दिन भी हड़ताल पर है। उधर बालाघाट में देर रात 108 एंबुलेंस नहीं आने से एक गर्भवती महिला की मौत हो गई। जानकारी के मुताबिक गर्भवती की तबीयत बिगड़ने के बाद 108 नंबर पर परिजनों ने फोन लगाया, इस पर वहां से जवाब मिला कि कुछ ही देर में एंबुलेंस भेज दी जाएगी। लेकिन लंबे समय तक इंतजार करने के बाद भी जब एंबुलेंस नहीं पहुंची तो परिजन महिला को दूसरे साधन से अस्पताल ले जाने लगे, लेकिन रास्ते में ही महिला को डिलेवरी हो गई और जच्चा-बच्चा दोनों ने दम तोड़ दिया।
हड़ताल पर बैठे करीब 3 हजार कर्मचारियों में ड्रावइर व इमरजेंसी मैनेजमेंट टेक्नीशियन (ईएमटी) स्टॉफ शामिल है। 108 एंबुलेंस कर्मचारियों का कहना है कि 8 घंटे की जगह 12 घंटे की ड्यूटी कराई जा रही है। उन्हें 9 हजार से 11 हजार तक वेतन दिया जा रहा है, जबकि दूसरे राज्यों में एंबुलेंस ड्राइवर का वेतन 16 हजार व ईएमटी का 19 हजार है। उन्होंने कहा कि एंबुलेंस का संचालन कर रही जिकित्जा हेल्थ केयर कंपनी ने मांगें नहीं मानी तो हड़ताल जारी रहेगी।

स्वच्छ भारत अभियान के तहत स्वच्छता पर जोर देने और खुले में शौच को बंद करने के लिए बिल गेट्स ने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ

माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान के तहत स्वच्छता पर जोर देने और खुले में शौच को बंद करने के लिए काफी तारीफ की। बिल गेट्स ने एक ब्लॉग में लिखा है कि पीएम मोदी ने एक ऐसी समस्या को उठाया है जिसके बारे में हम सोचना तक पसंद नहीं करते। उन्होंने लिखा है, ‘तकरीबन 3 साल पहले भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जन स्वास्थ्य पर एक साहसिक टिप्पणी की थी, जिसके बारे में आजतक हमने किसी निर्वाचित सदस्य के मुंह से नहीं सुनी थी। उस बयान का बड़ा असर पड़ता दिख रहा है। मोदी ने जो कहा, उस पर अमल किया।’
पीएम मोदी के भारत के स्वतंत्रता दिवस पर दिए गए भाषण का जिक्र करते हुए गेट्स ने लिखा है, ‘हम 21वीं सदी में रह रहे हैं। क्या हमें कभी इस बात को लेकर तकलीफ महसूस हुई कि हमारी माताएं और बहनें खुले में शौच करने को मजबूर हैं? गांव की गरीब महिलाएं रात के अंधेरे का इंतजार करती हैं ताकि वे शौच के लिए जा सकें। इसका उनके शरीर पर क्या असर पड़ेगा, कितनी बीमारियों का उनको खतरा है। क्या हम अपनी मां और बहनों की मर्यादा को ध्यान में रखकर उनके लिए शौचालय नहीं बना सकते हैं।’
ब्लॉग में बिल गेट्स ने लिखा है, ‘मेरे ख्याल से अन्य किसी राष्ट्रीय नेता ने इस तरह के संवेदनशील विषय पर इतने खुलेपन और सार्वजनिक रूप से टिप्पणी नहीं की है। मोदी ने सिर्फ भाषण ही नहीं दिया, बल्कि इस दिशा में काम भी किए हैं। भाषण के दो महीनों के बाद ही उन्होंने स्वच्छ भारत अभियान का शुभारंभ किया, जिसके तहत देशभर में करीब 7.5 करोड़ शौचालय बनाकर 2019 तक देश को खुले में शौच से मुक्त करना है। उन्होंने यह सुनिश्चित किया है कि अनोपचारित कचरा खुले माहौल में न फेंका जाए।’
उन्होंने लिखा है कि स्वच्छता की समस्या को हल करके हर साल हजारों जिंदगी को बचाया जा सकता है। इससे लड़कियां स्कूलों की ओर आकर्षित होंगी और देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। सफाई की स्थिति को बेहतर बनाने पर हमारे फाउंडेशन का खास जोर है और हम भारत सरकार के साथ मिलकर इसके लक्ष्यों को हासिल करने के लिए काम कर रहे हैं।
उन्होंने लिखा है कि पीएम मोदी के इन प्रयासों के अच्छे परिणाम भी सामने आ रहे हैं। उन्होंने लिखा है, ‘2014 में जब स्वच्छ भारत अभियान शुरू हुआ था, उस समय सिर्फ 42 फीसद भारतीय लोगों को ही उचित स्वच्छता उपलब्ध थी। आज 63 फीसद लोगों को इसका फायदा मिल रहा है। और 2 अक्टूबर, 2019 महात्मा गांधी की 150वीं जयंती तक इस काम को खत्म करने के लिए सरकार के पास विस्तृत योजना है। अधिकारियों को पता है कि कौन-से राज्य सही ट्रैक पर हैं और कौन पीछे है। इसका श्रेय भारत के मजबूत रिपोर्टिंग सिस्टम को जाता है।’

दो डॉक्टरों पर १.४ करोड़ का दंड लगाया सुप्रीम कोर्ट ने

बीमारी के नाम पर अभियुक्तों को शरण देने वाले अस्पतालों के लिए नसीहत है। सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा में गुरुग्राम के ऐसे ही एक प्राइवेट अस्पताल के प्रति सख्त रुख अपनाया है।
कोर्ट ने इस अस्पताल के दो डॉक्टरों को हत्या आरोपी पूर्व विधायक बलबीर उर्फ बाली को गिरफ्तारी से बचाने के लिए अस्पताल में शरण देने पर न्यायालय की अवमानना का दोषी माना है और उन पर 70 -70 लाख रुपये जुर्माना लगाया है। अस्पताल के मालिक डॉक्टर केएस सचदेवा और मेडिकल डायरेक्टर डॉक्टर मुनीश प्रभाकर जून के अंत तक सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में कुल 1.4 करोड़ रुपये जमा कराएंगे।
न्यायमूर्ति दीपक मिश्र की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने दोनों डॉक्टरों को रकम जमा कराने का आदेश देते हुए कहा कि इस रकम को गरीबों की चिकित्सा सुविधाएं मुहैया कराने में कैसे खर्च किया जाए इस पर कोर्ट छह जुलाई को सुनवाई करेगा। कोर्ट ने रजिस्ट्री को आदेश दिया है कि जमा कराई गई रकम फिक्स डिपॉजिट की जाएगी।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने 24 अक्टूबर, 2013 को हत्या आरोपी पूर्व विधायक बलबीर उर्फ बाली की जमानत रद कर उसे समर्पण करने का आदेश दिया था। बाली ने समर्पण नहीं किया और न ही पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया।
शिकायतकर्ता ने अवमानना याचिका दायर की। कोर्ट के सख्त रुख के बाद एक मई, 2015 को बाली गिरफ्तार हुआ। फिलहाल वह जेल में है। कोर्ट ने 15 दिसंबर, 2016 को बाली और उसे शरण देने वाले दोनों डॉक्टरों को न्यायालय की अवमानना का दोषी ठहराया था। मंगलवार को सजा के मुद्दे पर सुनवाई की।
डॉक्टरों ने बिना शर्त माफी मांगते हुए दया की गुहार लगाई गई। कहा कि वे अस्पताल के 10 फीसद बिस्तर गरीबों के लिए लिए आरक्षित रखेंगे, साथ ही एक साल तक गरीबों को क्लिीनिक सुविधा भी देंगे। दूसरी ओर याचिकाकर्ता के वकील ऋषि मल्होत्रा ने कहा कि अस्पताल का लाइसेंस रद होना चाहिए।
डॉक्टरों पर इतना जुर्माना लगाया जाए कि समाज में संदेश जाए। उन्होंने कहा कि जब कभी नेताओं की जमानत रद होती है तो वे अस्पताल में भर्ती हो जाते हैं। चाहे हरियाणा-पंजाब हो या बिहार सब जगह यही है। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनकर कहा कि वह डॉक्टरों को जेल भेजने के इच्छुक नहीं हैं।
उनकी माफी स्वीकार करते हैं, लेकिन उन्हें रकम देनी पड़ेगी जिसका उपयोग गरीबों को चिकित्सा सुविधाएं देने में किया जाएगा। कोर्ट ने शुरुआत में दोनों डॉक्टरों को एक-एक करोड़ रुपये जमा कराने को कहा था, लेकिन बाद में वकील के बार-बार अनुरोध करते पर कोर्ट ने राशि घटाकर 70-70 लाख यानी कुल 1.4 करोड़ कर दी।
बाली को डेढ़ साल तक गिरफ्तार न किए जाने और उसके अस्पताल में भर्ती रहने की कोर्ट ने सीबीआइ जांच कराई थी। जांच में पता चला कि बाली 527 दिन अस्पताल में भर्ती रहा। अदालत ने कहा था कि बिना उचित कारण इतने लंबे समय तक भर्ती रखना और कुछ नहीं बल्कि सुप्रीम कोर्ट के जमानत रद करने और ट्रायल कोर्ट के लगातार जारी किए जा रहे गैर जमानती वारंटों को निष्फल करना था।
क्या है मामला
मामला 2011 का है। प्राथमिकी के मुताबिक शिकायतकर्ता सीताराम लाइसेंसी कमीशन एजेंट है और रोहतक कलनौर अनाज मंडी में उसकी दुकान है। 6 मई, 2011 को चंदा मांगने के मामले में हुए झगड़े पर बाली अन्य साथियों के साथ शिकायतकर्ता की दुकान पर पहुंचा और वहां मौजूद विष्णु नामक व्यक्ति को गोली मार दी बाकी लोगों को धमकी देता हुआ भाग गया।

नक्सली हमले में शहीद नारायण सोनकर के परिवार ने रोका अंतिम संस्कार सी एम् को बुलाने की मांग

छत्तीसगढ़ के सुकमा में सोमवार को हुए नक्सली हमले में शहीद नारायण सोनकर के परिवार ने सीएम को बुलाने की मांग पर अंतिम संस्कार रोक दिया। उनका कहना है कि जब तक सीएम शिवराज सिंह चौहान नहीं आएंगे तब तक अंतिम विदाई नहीं दी जाएगी। परिवार की इस मांग पर डीआईजी सीआरपीएफ दिनेश त्रिपाठी ने परिजनों को समझाने का प्रयास किया लेकिन वे अपनी जिद पर अड़े रहे।
सांसद जनार्दन मिश्र द्वारा समझाइश देने के बाद वे अंतिम संस्कार के लिए तैयार हो गए। इसके बाद शहीद की अंतिम यात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में उनके अंतिम दर्शनों के लिए ग्रामीण सड़क के दोनों ओर खड़े हुए थे।
बेटा लेगा पति की मौत का बदला
नारायण की मौत की सूचना मिलने के बाद सुनीता टूटी नहीं बल्कि उन्होंने कहा कि यह उनके लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि उनकी प्रमुख रूप से यह मांग है कि गांव के स्कूलका नाम उनके पति के नाम पर रखा जाए और उनके गांव को तहसील मुख्यालय से जोड़ा जाए। बेटे को सीआरपीएफ में ही नौकरी दी जाए जिससे वह नक्सलियों से अपने पिता की मौत का बदला ले सके।

दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन का इस्तीफा

एमसीडी चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इसके साथ ही कांग्रेस में जारी अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है। अजय माकन ने इस्तीफा देते हुए कहा है कि वो अगले एक साल तक कोई पद नहीं लेंगे और एक साधारण कार्यकर्ता की तरह काम करते रहेंगे।
इस्तीफा देने के बाद मीडिया से बात करते हुए अजय माकन ने हार की जिम्मेदारी लेते हुए शीला दिक्षीत पर भी निशाना साधा। माकन ने कहा कि मुझ पर लगातार बयान दिए गए लेकिन मैं उनको लेकर कुछ नहीं कहूंगा। मैं हार की जिम्मेदारी लेता हूं और पद से इस्तीफा देता हूं।
उन्होंने आगे कहा कि अगले एक साल तक में कोई पद नहीं लूंगा और एक कार्यकर्ता की तरह काम करूंगा। हमने ठीक वापसी की लेकिन मुझे इससे बेहतर की उम्मीद थी। चुनाव आयोग को ईवीएम की जांच करनी चाहिए। अगर हम ईवीएम पर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं तो हमें आयोग पर भरोसा करना चाहिए।

तकनीकी समाधानों का बाजार ले रहा आकार कई मोबाइल ऐप लांच

सड़क सुरक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता के साथ ही, इससे जुड़े तकनीकी समाधानों का बाजार भी आकार ले रहा है। बाजार में ऐसे कई मोबाइल ऐप लांच हो चुके या हो रहे हैं जिनके उपयोग से न केवल हादसों को कम किया जा सकता है, बल्कि जरूरी मदद भी हासिल की जा सकती है। व्यक्तिगत चालकों के अलावा परिवहन प्रतिष्ठानों के लिए भी ये ऐप काफी उपयोगी साबित हो रहे हैं।
हाल ही में आईआईटी मद्रास ने एक ऐसा ऐप विकसित किया है जिसके जरिए ट्रांसपोर्टर या टूर आपरेटर अपने ड्राइवरों की गलतियों के साथ उनके तनाव और थकान के स्तर को दूर बैठे-बैठे आंक सकते हैं तथा उनका मार्गदर्शन कर सकते हैं। यह ऐप ड्राइवर के साथ-साथ उसके नियोक्ता को भी रियल टाइम फीड प्रदान करता है। यदि ड्राइवर ने ऐप द्वारा दिए गए एलर्ट के मुताबिक सुधार कर लिया तो ठीक, अन्यथा नियोक्ता के निर्देश उसे ऐसा करने को विवश कर देंगे। राज्य परिवहन निगमों के लिए भी यह ऐप काफी उपयोगी साबित हो सकता है, जिनके पास अपने ड्राइवरों की ड्राइविंग पर नजर रखने का कोई कारगर साधन फिलहाल नहीं है।
इस समय बाजार में तकरीबन आधा दर्जन ऐसे ऐप उपलब्ध हैं जिनका उपयोग कर ड्राइवर सफर को अपेक्षाकृत सुरक्षित बना सकते हैं। मसलन क्रूजर ड्राइविंग के वक्त मोबाइल फोन के इस्तेमाल को सीमित करता है। यह केवल उन्हीं कॉल को रिसीव करता है जो अत्यावश्यक होती है और कॉल करने वाले को कुछ देर बाद कॉल करने को कहता है। इसी तरह सेफली होम नामक ऐप हादसे की स्थिति में वाहन की लोकेशन के साथ पुलिस और एंबुलेंस को एलर्ट भेजता है। कुछ इसी प्रकार की मदद वन टच रिस्पांस नामक ऐप से मिलती है। एक्सीडेंट होने पर इस कंपनी के लोग पहले स्वयं मौके पर पहुंचकर जरूरी सहायता उपलब्ध कराते हैं तथा फिर पुलिस व एंबुलेंस को बुलाते हैं। पार्टी हार्ड ड्राइवर्स नामका ऐप ऐसे लोगों के लिए है जो अक्सर शराब पीते गाड़ी चलाते हैं। ऐसे लोगों को यह ऐप उचित शुल्क पर ड्राइवर उपलब्ध कराता है।
राजस्थान में एक ऐसा ऐप चलन में आया है जो ड्राइवर को दुर्घटना की स्थिति में आसपास उपलब्ध पुलिस पिकेट, अस्पतालों और एंबुलेंस सेवाओं आदि की लोकेशन बताकर उनसे कांटैक्ट स्थापित कराता है। इन ऐप की उपयोगिता को देखते हुए सरकार स्वयं सेवी संगठनों तथा सूचना व संचार क्षेत्र की कंपनियों को इस दिशा में काम करने के लिए प्रेरित कर रही है। मसलन, सड़क सुरक्षा के लिए काम करने वाला ‘सेव लाइफ’ फाउंडेशन जल्द ही वोडाफोन की मदद से ‘रोड सेफ’ नामक ऐप लांच करने वाला है।
इससे पहले स्वयं सरकार ने ऐप एम-परिवहन और ई-चालान लांच कर इस दिशा में पहल की थी। एम-परिवहन यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले ड्राइवर के डीएल व आरसी की आनलाइन जांच में पुलिस व आरटीओ की मदद करता है। जबकि ई-चालान ऑनलाइन चालान का प्लेटफार्म उपलब्ध कराता है।

व्यापारियों के लिए जीएसटी राहतभरी खबर

उधारी से परेशान व्यापारियों के लिए जीएसटी राहतभरी खबर लेकर आ रहा है। जुलाई से लागू होने वाली एकीकृत कर प्रणाली जीएसटी के इनपुट टैक्स क्रेडिट चैप्टर में नए नियम जारी कर दिए गए हैं। इसके तहत उधारी में माल खरीदने वाले व्यापारी को बेचवाल व्यापारी (जिसने उसे माल बेचा) का भुगतान 180 दिन यानी छह महीने में करना ही होगा।
यदि इस समय-सीमा में उधारी नहीं चुकाई तो खरीदने वाले व्यापारी को इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं मिलेगा। इसके अलावा माल बेचने वाले व्यापारी का टैक्स भी खरीदने वाले को चुकाना होगा। बेचवाल द्वारा भरा गया टैक्स तो खरीदार व्यापारी को चुकाना होगा ही, इसके साथ उस पर छह महीने या ज्यादा का ब्याज भी चुकाना पड़ेगा।
सीए भरत नीमा के मुताबिक ईमानदार और उधारी वसूलने में परेशान हो रहे व्यापारियों के लिए यह अच्छा प्रावधान है। जीएसटी के जरिए समय पर व्यापारियों की उधारी वसूली की व्यवस्था खुद सरकार ने कर दी है। जीएसटी का टैक्स रेट जारी होने के साथ ही प्रावधान के तहत ब्याज की दरें भी जल्द जारी हो जाएंगी।
नीमा के मुताबिक, जीएसटी एक देश एक बाजार की कल्पना पर आधारित है। अभी यहां का व्यापारी पैसा डूबने या उधारी के डर से सुदूर प्रदेश के व्यापारी से सीधे कारोबार करने में डरता है। उधारी चुकाने की मियाद लागू होने से व्यापारियों का यह डर खत्म होगा। ईमानदार कारोबार और देशव्यापी व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।
बाजार के कई व्यापारियों के लिए उधारी वसूलना ताजा स्थिति में सिरदर्द से कम नहीं है। अहिल्या चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इडस्ट्री के सचिव सुशील सुरेका के मुताबिक उधार में माल लेने वाले कुछ व्यापारी तो ऐसे होते हैं, जिनसे वसूली नहीं हो पाती।
ऐसे में पूंजी अटकने से व्यापार की लागत और परेशानी बढ़ जाती है। इस स्थिति में वर्तमान कर प्रणाली में कोई व्यवस्था नहीं थी, लेकिन अंकुश के लिए बाजार ने अपना सिस्टम बना रखा था। कई तरह के व्यापार में नकद माल लेने वालों के लिए अलग रेट हैं और उधारी की मियाद के हिसाब से अलग। जीएसटी में सब कुछ ऑनलाइन होगा।
कई व्यापारी के साथ अधिकारी भी उधारी चुकाने की मियाद लागू होने से हैरान हैं। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर बाजार की उधारी से सरकार का क्या वास्ता। सीए नीमा के मुताबिक जीएसटी में क्रेडिट रेटिंग सिस्टम भी है। इसके जरिए समय पर टैक्स चुकाने से लेकर पालन प्रतिवेदन पर रेटिंग मिलेगी। ऐसे में समय पर उधारी नहीं चुकाने वाले व्यापारी इस सिस्टम से रडार पर आ जाएंगे। उनकी रेटिंग गिरेगी। आगे जाकर गड़बड़ी करने वाले व्यापारियों को ब्लैक लिस्ट में डालना भी संभव हो जाएगा।