उत्तर कोरिया ने संयुक्त सैन्य अभ्यास पर अमेरिका और दक्षिण कोरिया को धमकी दी

उत्तर कोरिया ने अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है. इतना ही नहीं उसने धमकी दी है कि अगर इसे नहीं रोक जाता है, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे. उत्तर कोरिया ने चेताते हुए कहा है कि इस स्थिति में वह हमला कर सकता है. ऐसा उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी केसीएनएस के बयान में कहा गया है. इससे क्षेत्र में तनाव बढ़ सकता है. दूसरी ओर अमेरिकी सेना ने सुरक्षा को मजबूती देने के लिए दक्षिण कोरिया में एक हमलावर ड्रोन प्रणाली और इसकी देखरेख के लिए जवानों को तैनात करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. गौरतलब है कि अमेरिका व दक्षिण कोरिया के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास शुरू हो गया है जो 24 मार्च तक चलेगा.
उत्तर कोरिया ने एक बयान में कहा है कि यदि अमेरिका और दक्षिण कोरिया, उसकी संप्रभुता में दखल देते हैं तो वह भूमि, हवा, समुद्र तथा जल के भीतर से बेहद सटीक हमले करेगा, जिसके गंभीर परिणाम होंगे. उत्तर कोरिया ने दोनों देशों को यह भी चेताया है कि ‘अमेरिका के परमाणु सक्षम वाहक व अन्य सामरिक हथियार कोरियाई सेना की जद में हैं.’
अमेरिका ने भी अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देते हुए दक्षिण कोरिया में हमलावर ड्रोन प्रणाली तैनात कर दी है. वहां के रक्षा विभाग के एक प्रवक्ता ने बताया कि अगले वर्ष तक हमलावर ड्रोन प्रणाली को तैनात कर दिए जाने की खबर दक्षिण कोरिया के लिए नई नहीं है लेकिन इसकी घोषणा प्योंगयांग द्वारा हाल में चार बैलिस्टिक मिसाइलों का परीक्षण किए जाने के एक सप्ताह के बाद की गई है.
पेंटागन के प्रवक्ता नौसेना कैप्टन जेफ डेविस ने सोमवार को कहा, ‘दक्षिण कोरियाई सशस्त्र बलों और अमेरिकी वायु सेना के बीच समन्वय के बाद अमेरिकी सेना ने दक्षिण कोरिया के कुनसान वायु सेना के अड्डे पर एक ग्रे ईगल मानवरहित एरियल सिस्टम कंपनी को स्थायी रूप से तैनात करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.’ एमक्यू-1सी ग्रे ईगल, स्टिंगर और हेलफायर मिसाइलों के साथ-साथ अन्य हथियारों को भी ले जाने में सक्षम है. ड्रोन के रखरखाव के लिए 128 सैनिकों की एक कंपनी की जरूरत होती है और प्रत्येक कंपनी में आमतौर पर 12 ग्रे ईगल होते हैं.

आज राज्यपाल मृदुला सिन्हा से मुलाकात करेंगे कांग्रेस विधायक दल के सदस्य

गोवा में सरकार बनाने का दावा करने के लिए कांग्रेस विधायक दल के सदस्य आज राज्यपाल मृदुला सिन्हा से मुलाकात करेंगे और उन्हें बताएंगे कि उनके पास पर्याप्त संख्या बल है. कांग्रेस विधायक दल के नेता चंद्रकांत केवलकर ने बताया, ‘आज सुबह कांग्रेस विधायक दल की बैठक होगी और फिर हम सरकार बनाने का दावा करने के लिए सुबह 10 बजे राज्यपाल से मिलेंगे.’ उन्होंने कहा, ‘हमारे पास पर्याप्त संख्या बल है. हमारी पार्टी अकेली सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी है और सरकार बनाने के लिए हमें बुलाया जाना चाहिए.’ गोवा के राज्यपाल भाजपा नीत गठबंधन को सरकार बनाने के लिए पहले ही आमंत्रित कर चुके हैं और आज शाम शपथ ग्रहण समारोह होगा.
कांग्रेस ने सरकार बनाने के लिए खुद को न बुलाए जाने पर आपत्ति जताई है. उसका कहना है कि गोवा विधानसभा चुनाव में वह अकेले सबसे बड़े दल के तौर पर उभरी है. कांग्रेस के 17 विधायक हैं जबकि भाजपा के विधायकों की संख्या 13 है. गोवा फारवर्ड पार्टी और एमजीपी के तीन-तीन विधायक हैं, तीन विधायक निर्दलीय और राकांपा का एक विधायक है.
पार्टी ने उच्चतम न्यायालय में एक याचिका दायर कर मुख्यमंत्री के तौर पर मनोहर पर्रिकर की नियुक्ति को चुनौती भी दी है. उच्चतम न्यायालय ने आज 11 बजे इस मामले की सुनवाई नियत की है. इस बीच, कांग्रेस ने भी कल रात भी राज्यपाल को अभ्यावेदन दे कर उनसे सरकार बनाने के लिए खुद को बुलाने को कहा. कांग्रेस विधायक दल ने कहा कि उनके पास विधायकों की पर्याप्त संख्या है और वह सदन में बहुमत साबित करने की स्थिति में हैं.
कावलेकर ने कहा ‘‘हमारे राजनीतिक विरोधी (भाजपा) लोगों से जनादेश न मिलने के बावजूद यह भ्रम पैदा करने की कोशिश में हैं कि उनके पास विधानसभा में पर्याप्त बहुमत है. यह अत्यंत निचले स्तर का अवसरवाद है और संविधान में इसकी अनुमति नहीं है.’’ अभ्यावेदन में कहा गया है, ‘‘सरकार बनाने का आमंत्रण हासिल करने के लिए किसी भी तरह का चुनाव पश्चात गठबंधन दिखाना (जैसा कि भाजपा कर रही है) लोगों के उस जनादेश की हार होगी जिसमें भाजपा की तत्कालीन सरकार को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया गया है.’’ इसमें कहा गया है ‘‘अकेले सबसे बड़े दल के तौर पर उभरी पार्टी (कांग्रेस) को सरकार बनाने का अवसर दिए बिना भाजपा को आमंत्रित करना उन लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन होगा जिन्होने कांग्रेस को राज्य में सबसे बड़े दल के तौर पर चुना है.’’

आम आदमी पार्टी को EVM यानी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन पर संदेह

पंजाब और गोवा में अपेक्षित सफलता ना मिलने के बाद आम आदमी पार्टी ने EVM यानी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन पर संदेह ज़ाहिर करते हुए मांग की है कि आगामी दिल्ली नगर निगम चुनाव में बैलट पेपर से चुनाव कराये जाएं. आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने कहा कि ‘UP में भी नगर पालिका और नगर पंचायत के चुनाव बैलट पेपर से होते हैं, दिल्ली एमसीडी (MCD) के चुनाव भी बैलेट पेपर से कराये जा सकते हैं.’ संजय सिंह ने कहा कि पंजाब चुनाव जीतने वाली कांग्रेस को भी ईवीएम (EVM) पर संदेह है, बसपा को भी संदेह है और दूसरी पार्टियों भी संदेह है यही नहीं बीजेपी जब तक विपक्ष में थी तब तक उसके नेता और समर्थक EVM पर सवाल उठाते थे तो ऐसे में बैलट पेपर से चुनाव कराने में क्या हर्ज है?
दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार है और निगम चुनाव कराने की ज़िम्मेदारी उसकी है लेकिन इसके लिए उपराज्यपाल की मंज़ूरी चाहिए होगी. दिल्ली में अप्रैल-मई के महीने में तीनों नगर निगम में चुनाव हो सकते हैं.
आपको बता दें कि पंजाब चुनाव में आम आदमी पार्टी को 117 में से 22 सीटें मिली जबकि गोवा में 40 सीटों में से एक भी सीट पर उसको जीत नहीं मिली और उसके सीएम उम्मीदवार तक चुनाव हार गए. जिसके दो दिन बाद आम आदमी पार्टी नेता EVM से होने वाले चुनाव पर सवाल उठा रहे हैं. हालाँकि इससे पहले बसपा प्रमुख मायावती ने शनिवार को EVM पर सवाल उठाकर दोबारा बैलट पेपर से चुनाव कराने की मांग की थी जिसको चुनाव आयोग ने खारिज कर दिया था. बता दें कि लालू प्रसाद यादव ने भी ईवीएम पर शक जताया है.

अमेरिकी विशेषज्ञों ने भी माना नरेंद्र मोदी की नेतृत्‍व क्षमता का लोहा

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेतृत्‍व क्षमता का लोहा अब अमेरिकी विशेषज्ञों ने भी माना है. अमेरिकी शीर्ष विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तरप्रदेश और उत्तराखंड के विधानसभा चुनाव में भाजपा की शानदार जीत के बाद वर्ष 2019 के आम चुनावों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्पष्ट तौर पर एक पसंदीदा नेतृत्वकर्ता के तौर पर उभरे हैं. एक विशेषज्ञ ने कहा कि पांच राज्यों में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों के नतीजे दिखाते हैं कि वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव के नतीजे कोई असामान्य नहीं थे.  एक अन्य विशेषज्ञ ने कहा कि ऐसा लगता है कि मोदी 2019 के बाद भी भारत का नेतृत्व करते रहेंगे.जॉर्ज वाशिंगटन यूनिवर्सिटी में राजनीति विज्ञान एवं अंतरराष्ट्रीय मामलों के सहायक प्रोफेसर एडम जीगफेल्ड ने कहा कि विधानसभा चुनाव ज्यादा बदलाव का संकेत नहीं देते. उत्तरप्रदेश चुनाव के नतीजों ने दिखाया है कि वर्ष 2014 के आम चुनाव कोई ‘असामान्य’ चीज नहीं थे.
उन्होंने कहा, ‘यह भाजपा के लिए एक बड़ी जीत थी. उसका उम्मीदवार दो पिछले विजेताओं-बसपा और सपा की तुलना में कहीं अधिक अंतर से जीत गया.’अमेरिकन एंटरप्रोइज इंस्टीट्यूट के शोधार्थी सदानंद धूमे ने कहा कि इन चुनावों ने मोदी को वर्ष 2019 के चुनाव के लिए एक ‘स्पष्ट और पसंदीदा विजेता’ के तौर पर स्थापित कर दिया है. उन्होंने कहा, ‘मोदी वर्ष 2019 की दौड़ में सबसे आगे हैं.’ जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी के वॉल्श स्कूल ऑफ फॉरेन सर्विस के प्रोफेसर इरफान नूरुद्दीन ने कहा कि वर्ष 2019 में भाजपा को सीधा बहुमत मिलने की संभावना कम है और मोदी गठबंधन की सरकार बनाने की दिशा में बढ़ेंगे. उन्होंने कहा कि भाजपा का एक के बाद एक राज्य में चुनाव प्रचार सफल रहा है जबकि विपक्ष ऐसा करने में नाकाम रहा है. नूरुद्दीन ने कहा कि जिस राज्य में पार्टी को सीधे विपक्ष का सामना करना पड़ता है, वहां यह अच्छा प्रदर्शन नहीं करती. यदि विपक्ष एक साथ आ जाए तो भाजपा को परास्त किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि पार्टी को जब बिखरे हुए विपक्ष का सामना करना पड़ता है, वहां उसे लाभ मिलता है. वर्ष 2019 में सत्ताविरोधी लहर मौजूद होगी.
चुनाव के दौरान उत्तरप्रदेश में मौजूद रहे धूमे ने कहा कि इन चुनावों में भाजपा ने खुद को जाति से ऊपर बताया लेकिन वहां जाति कार्ड खेला. राज्य में लोगों के साथ हुई बातचीत का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, ‘नोटबंदी बेहद लोकप्रिय है. इसने उस भारतीय जनता का दिल और दिमाग जीत लिया, जो इस नीति के चलते परेशान हुई. यहां एक संजीदा व्यक्ति है, जिसने भ्रष्ट और अमीर लोगों पर एक सैद्धांतिक प्रहार किया है.’ हालांकि धूमे ने यह भी कहा कि उत्तरप्रदेश में इस ऐतिहासिक जीत के बाद मोदी संभवत: ऐसे आर्थिक सुधार की दिशा में नहीं बढ़ेंगे, जैसा निजी क्षेत्र चाहता है. काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशन्स में भारत, पाकिस्तान और दक्षिण एशिया के मामलों की वरिष्ठ शोधार्थी एलीसा आयर्स ने कहा कि भारत अपने उन आर्थिक सुधारों को बढ़ाने जा रहा है, जो देश की जनता को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं. भाजपा अब राज्यसभा में बहुत सी सीटें हासिल करेगी, जो उसे भूमि अधिग्रहण अधिनियम और श्रम सुधार जैसे लंबित सुधारों को अंजाम देने में मदद करेंगी. वह वर्ष 2018 में सीटें हासिल करना शुरू कर देंगे. भाजपा वर्ष 2019 और इसके परे देख रही है.