मैं राष्ट्र निर्माण में सहयोग करती हूं तुम राष्ट्र विघटन में

देश में पत्थरबाजी का मुद्दा गर्माया हुआ है। एक निजी चैनल के स्टिंग के बाद राष्ट्रीय मीडिया और सोशल मीडिया पर ये मुद्दे काफी उछल रहा है। शुक्रवार को इस मुद्दे पर राज्यसभा में भी चर्चा होने की उम्मीद है। वहीं अब इस मुद्दे पर कॉमनवेल्थ चैम्पियन बबिता फोगाट ने भी ट्वीट किया है। बबिता ने गुरुवार शाम को इस मुद्दे पर एक पिक्चर ट्वीट की, इस पिक्चर में एक महिला मजदूरी करते हुए दिखाई गई है साथ ही लिखा है कि, ” फर्क बस इतना है, तुमझें और मुझमें…  मुझे पत्थर ढ़ोने पर बमुश्किल 200/300 मिलते है और तुझे पत्थर फेंकने के कम से कम 500, मैं राष्ट्र निर्माण में सहयोग करती हूं तुम राष्ट्र विघटन में…”
पिछले दिनो एक निजी टीवी चैनल ने खुफिया स्टिंग ऑपरेशन में दावा किया गया है कि जम्मू-कश्मीर में स्थानीय नौजवानों को पत्थरबाजी करने के लिए पैसे दिए जाते हैं। इन पत्थरबाजों ने खुफिया कैमरों के सामने स्वीकार किया कि वो नियमित तौर पर पत्थरबाजी करते रहे हैं। एक पत्थरबाज कैमरे के सामने कह रहा था कि वो साल 2008 से ही पत्थरबाज कर रहा है। पत्थरबाज फारूख अहमद लोन ने बताया कि उसे इस काम के लिए 500 से पांच हजार रुपये तक मिलते हैं। पत्थरबाज ने कबूल किया कि हिज्बुल मुजाहिद्दीन के उग्रवादी बुरहान वानी की मौत के बाद हुए हुए हिंसक प्रदर्शनों के दौरान भी उसने पत्थरबाजी की थी।

मध्यप्रदेश में हुई ट्रैन विस्फोट की घटना के तार लखनऊ में मारे गए आतंकी से जुड़े हो सकते है

केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह लखनउ में आईएसआईएस के एक संदिग्ध आतंकवादी के मारे जाने और मध्य प्रदेश के शाजापुर में ट्रेन में विस्फोट की घटना पर कल संसद में बयान दे सकते हैं। आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि गृह मंत्री लखनउ और शाजापुर की घटनाओं पर संसद में विस्तृत बयान दे सकते हैं। बजट सत्र का दूसरा चरण कल शुरू होगा। बीती रात लखनउ के एक घर में छिपे संदिग्ध आईएसआईएस आतंकवादी को करीब 12 घंटे चले अभियान के बाद मार गिराया गया।
पुलिस ने कहा कि मध्य प्रदेश में कल ट्रेन में विस्फोट की घटना के तार लखनउ में मारे गए आतंकी संदिग्ध सैफुल्ला से जुड़े हो सकते हैं। शाजापुर में भोपाल-उज्जैन यात्री ट्रेन में आईईडी विस्फोट में दस लोग घायल हो गए थे, जिनमें से तीन की हालत गंभीर है।

उज्जैन बम ब्लास्ट में शामिल एक आतंकवादी ने खुलासे में प्रधान मंत्री की लखनऊ रैली में विस्फोट की असफल कोशिश की

उज्जैन ट्रेन धमाके में कथित रूप से शामिल आई.एस. से प्रेरित एक आतंकी मॉड्यूल ने पिछले वर्ष दशहरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लखनऊ में हुई रैली में विस्फोट करने की कोशिश की थी जो असफल रही। इस रहस्य का खुलासा मोहम्मद दानिश और आतिफ मुजफ्फर की पूछताछ के दौरान हुआ। ये दोनों फिलहाल राष्ट्रीय जांच एजैंसी (एन.आई.ए.) की हिरासत में हैं।
दानिश ने अपने बयान में कहा है कि यह समूह ‘चरमपंथ के प्रभाव के स्तर को जानने के लिए’ विस्फोट करने को बेसब्र हो रहा था और इस प्रक्रिया के दौरान समूह ने विभिन्न स्थानों पर बम लगाने के कई असफल प्रयास भी किए थे। उसने बताया कि आतंकी समूह के स्वयंभू आमिर (प्रमुख) आतिफ मुजफ्फर ने स्टील की पाइपों और बल्बों की मदद से एक बम भी तैयार किया। आतिफ ने भी दानिश के इस बयान की पुष्टि की है। वहीं दानिश ने 11 मिनट में ही बम लगाकर वापिस लौट गया था।

लोकसभा में जीएसटी संबंधी चार बिल मंजूर

देश को एक बाजार के रूप में पिरोने और अब तक के सबसे बड़े अप्रत्यक्ष कर सुधार के लिए मील का पत्थर माने जा रहे वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) से जुड़े चार विधेयकों को लोकसभा ने बुधवार को ध्वनिमत से पारित कर दिया। सरकार का जीएसटी को इस साल एक जुलाई से लागू करने का लक्ष्य है। चार विधेयकों केंद्रीय जीएसटी विधेयक, एकीकृत जीएसटी विधेयक, केंद्रशासित क्षेत्र जीएसटी विधेयक और जीएसटी (राज्यों को क्षतिपूर्ति) विधेयक पर सदन में दिन भर चली चर्चा के बाद विपक्ष की आपत्तियों का जवाब देते हुये वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि इनके कानून बनने से पूरा देश एक बाजार के रूप में स्थापित हो जायेगा और वस्तुओं की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित हो सकेगी तथा एक सरल कर व्यवस्था लागू होगी जिसका उल्लंघन करना आसान नहीं होगा। उन्होंने कुछ विपक्षी सदस्यों की इस आशंका को निर्मूल बताया कि जीएसटी परिषद को कर की दर तय करने का अधिकार देने से इस मामले में संसद की संप्रभुता समाप्त हो जायेगी। उन्होंने कहा परिषद का काम सिर्फ सिफारिश करना है जबकि सिफारिशों पर अमल के लिए कानून संसद और राज्य विधानसभाएं ही बनायेंगी। जीएसटी में कर के चार स्लैब तय किये गये हैं। पहला स्लैब शून्य प्रतिशत का है जिसमें मुख्य रूप से खाद्यान्न तथा अन्य जरूरी पदार्थों को रखा जायेगा। दूसरा स्लैब पांच प्रतिशत का है। मानक स्लैब 12 और 18 प्रतिशत के रखे गये हैं जबकि चौथा स्लैब 28 प्रतिशत का है। जिन वस्तुओं पर अभी 28 प्रतिशत से ज्यादा कर है उसका इससे ऊपर का हिस्सा उपकर के रूप में एकत्रित कर राज्यों की क्षतिपूर्ति के लिए इस्तेमाल किया जायेगा। इसके बाद भी यदि कुछ राशि बचेगी तो वह केंद्र और राज्यों के बीच बांटी जायेगी। केंद्रीय जीएसटी विधेयक में अधिकतम 40 प्रतिशत का प्रावधान रखा गया है। श्री जेटली ने बताया कि किस वस्तु को किसी स्लैब में रखना है इस पर जीएसटी परिषद् अगले महीने से काम शुरू कर देगी। शराब को विधेयक के दायरे से बाहर रखा गया है। पेट्रोलियम उत्पाद विधेयक के दायरे में हैं, लेकिन उन पर जीएसटी के तहत कर लगाना कब शुरू करना है इसके बारे में फैसला जीएसटी परिषद को बाद में करना है। साथ ही अचल संपत्ति को भी जीएसटी के दायरे में लाने पर चर्चा हुई थी किंतु राज्य सरकारों ने स्टाम्प ड्यूटी से होने वाले राज्सव के नुकसान की आशंका जतायी थी। हालाँकि, दिल्ली सरकार इसके पक्ष में थी। उन्होंने कहा कि परिषद् में यह सहमति बनी थी कि जीएसटी लागू होने के एक साल के भीतर इस पर पुनर्विचार करेंगे। वित्त मंत्री के जवाब के बाद सदन ने चारों विधेयकों को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी तथा विपक्षी सदस्यों के दो संशोधनों को मत विभाजन के जरिये और कुछ अन्य को ध्वनिमत से नामंजूर कर दिया। श्री जेटली ने कहा कि अभी उत्पाद कर, सेवा कर, मनोरंजन कर, मूल्य वर्द्धित कर, चुंगी जैसे कई तरह के कर चुकाने पड़ते हैं तथा कारोबारियों को कई दफ्तरों और अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। जीएसटी से ये सभी कर एक में ही समाहित हो जायेंगे। कांग्रेस के केसी वेणुगोपाल के एक कर, लेकिन कई प्रकार के उपकर के आरोप के जवाब में उन्होंने कहा कि जीएसटी लागू करने से राज्यों को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए उपकर की व्यवस्था सिर्फ पांच साल के लिए लागू की गयी है। यह कर की दर बढ़ाने की तुलना में बेहतर विकल्प है क्योंकि कर बढ़ाने से महंगाई बढ़ती। उन्होंने कहा कि जीएसटी के आने से कर के ऊपर कर नहीं लगेगा जिससे वस्तुओं की कीमतों में थोड़ी कमी आयेगी। साथ ही कारोबारियों को सिर्फ एक ही अधिकारी के पास जाना पड़ेगा। वित्त मंत्री ने कहा कि प्रारंभ में जीएसटी को लेकर राज्यों की अनेक आपत्तियां थीं, लेकिन जीएसटी परिषद् की कई दौर की बैठक के बाद सबका सर्वसम्मति से समाधान ढूंढ़ा गया। जीएसटी परिषद एक स्थायी निकाय है और भविष्य में भी जो भी आपत्तियां होंगी उनका आम राय से इसमें हल निकाला जायेगा और बहुमत की राय नहीं थोपी जायेगी। उन्होंने कहा कि मूल्य वर्द्धित कर व्यवस्था को जब लागू किया गया था तो अनेक राज्यों ने अपने को इसके दायरे से बाहर रखा था, लेकिन धीरे-धीरे सभी ने इसके लाभों को देखते हुये इसे स्वीकार कर लिया था। अनेक कर स्लैबों के बारे में विपक्ष की आपत्ति पर श्री जेटली ने कहा कि हवाई चप्पल और बीएमडब्ल्यू कार पर एक समान कर नहीं लगाया जा सकता। आम आदमी और धनाढ्य वर्ग के इस्तेमाल की चीजों पर कर की दर एक रखना उचित नहीं होगा। यह देखना जरूरी है किस सामान का उपयोग कौन सा वर्ग करता है। इन विधेयकों को धन विधेयक के रूप में पेश किये जाने से जुड़ी आपत्तियों पर वित्त मंत्री ने कहा कि 1950 में संविधान लागू होने के बाद से आज तक ऐसा कभी नहीं हुआ जब कराधान संबंधी विधेयक को धन विधेयक के रूप में न लाया गया हो। मुनाफा निरोधी प्रावधान पर उन्होंने कहा कि इसका मकसद यह है कि कर में मिलने वाली रियायतों को निर्माता अपनी जेब में न डालकर उसका लाभ उपभोक्ताओं को दें। उन्होंने इस तर्क को गलत बताया कि नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) को जीएसटी से जुड़े मामलों की जांच करने का अधिकार नहीं होगा। उन्होंने कहा कि कैग को संविधान से और उसके अपने अधिनिमय से अधिकार मिला हुआ है। उसे कराधान कानूनों से शक्तियां नहीं मिलती हैं। कुछ सदस्यों की इस आपत्ति पर कि विधेयकों में कृषक की परिभाषा पूर्ण नहीं है क्योंकि इसमें सिर्फ खेती करने वालों की बात कही गयी है और डेयरी उद्योग और मुर्गी पालन को इसमें नहीं रखा गया है, वित्त मंत्री ने कहा कि इस परिभाषा सिर्फ पंजीकरण के उद्देश्य से है। लगभग सभी कृषि उत्पादों को शून्य प्रतिशत के स्लैब में ही आने की संभावना है।

ग्रीस दिवालिया होने की कगार पर

ग्रीस  बीते कुछ सालों से आर्थिक संकट से जूझ रहा है. लगातार संकट गहराने की वजह से कभी दुनिया जीतने का सपना देखने वाला यह देश दिवालिया होने की कगार पर आ खड़ा हुआ है. ग्रीस पर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) का 11 लाख करोड़ रुपये का कर्ज चढ़ चुका है. आईएमएफ ने ग्रीस को 12 हजार करोड़ रुपये की पहली किश्त चुकता करने के लिए 30 जून तक की मोहलत दी थी.
आईएमएफ ने ग्रीस के सामने कुछ शर्तें रखी हैं और यदि वह उन शर्तों को नहीं मानता है तो वह यूरोपियन यूनियन और यूरो जोन से बाहर हो सकता है. ग्रीस की लगातार कोशिशों के बाद भी आईएमएफ कर्ज चुकाने की मोहलत बढ़ाने को राजी नहीं हो रहा है. ग्रीस के प्रधानमंत्री एलेक्सिस सिप्रास ने देश के बैंकों को 7 दिन तक बंद रखने का ऐलान किया है. वहां के लोगों को एटीएम से सिर्फ 60 यूरो तक ही निकालने की इजाजत दी गई है. साथ ही सभी विदेशी लेनदेन पर भी पाबंदी लगा दी गई है. आम लोग इस बात से चिंतित हैं कि अगर यूरो को पुरानी करेंसी ड्रैकमा में तब्दील कर दिया गया तो उनकी मुद्रा की कोई कीमत नहीं रह जाएगी.
इधर ग्रीस के कर्ज में डूबने की वजह से भारत सहित हांगकांग और जापान के शेयर बाजारों में भारी गिरावट दर्ज की गई. जानकारों का मानना है कि ग्रीस में आए इस संकट का भारतीय अर्थव्यवस्था पर लंबी अवधि में कोइ फर्क नहीं पड़ेगा. इस संकट की वजह 1999 में आए भीषण भूकंप को माना जा रहा है. इस भूकंप के बाद 50000 इमारतों का पुनर्निर्माण सरकारी पैसे से कराया गया था. ग्रीस पर 2004 के ओलंपिक खेलों में जरूरत से ज्यादा पैसा खर्च करने के भी आरोप हैं. अगर वह आईएमएफ का कर्ज चुकाने में नाकाम रहा तो उसे 21वीं सदी का पहला डिफॉल्टर देश बनने से कोई नहीं बचा पाएगा. आईएमएफ ने कर्ज चुकाने की मियाद बढ़ाकर 20 जुलाई घोषित की है. डिफॉल्टर घोषित होने पर उसे अपनी पुरानी मुद्रा ड्रैकमा लागू करनी होगी.